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सुप्रीम कोर्ट ने अपने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें वनवासियों के निष्कासन का निर्देश दिया गया था। जिनपे वन भूमि के दावे कानून के तहत खारिज कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा है कि वे इन दावों पर निर्णय लेने वाले अधिकारियों के साथ-साथ दावों का आकलन करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत करें। सुप्रीम कोर्ट 10 जुलाई, 2019 को मामले की सुनवाई करेगा। तथा राज्य के मुख्य सचिवों को वन भूमि पर दावों की अस्वीकृति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें शीर्ष अदालत के 13 फरवरी के आदेश को संशोधित करने के साथ-साथ उसी के कार्यान्वयन पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की गई थी। केंद्र ने कहा कि वन अधिकार कानून एक कल्याणकारी कानून है और इसे गरीबों और अनपढ़ लोगों के लाभ के लिए माना जाना चाहिए।

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