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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफ़ी समय से लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने पर ज़ोर देते रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय बंटी हुई है। उनका कहना है कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक काम पर भी असर पड़ता है। अगर देश में सभी चुनाव एक साथ होते हैं तो पार्टियां भी देश और राज्य के विकास कार्यों पर ज़्यादा समय दे पाएंगी। एक देश, एक चुनाव लागू करने के लिए इसके लिए उन्होंने सभी पार्टियों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है।

डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई और गोवा फॉर्वर्ड पार्टी ने इस विचार का विरोध किया था। कांग्रेस का कहना है कि अपना रूख विपक्षी पार्टीयों से बात करने के बाद तय करगी। वाम दलों का कहना है कि यह संघवाद दमन और अव्यवहारिक विचार है। इससे लोकतंत्र की हत्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां इस नियम से पैसों कि बचत होगी इसका जवाब देते हुए राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर सुहास पलशिकर कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि इससे पैसा बचेगा। उनका कहना है कि मान लीजिए अगर पैसा बच भी रहा है तो क्या पैसा बचाने के लिए लोकतंत्र को ख़त्म कर दिया जाएगा. अब यह देखना होगा क्या विपक्ष की पार्टीये एक देश एक चुनाव में के नियम को समर्थन देगी या नहीं।

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