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पश्चिमी देशों के कचरे के लिए अब एशियाई देश डंपिंग यार्ड नहीं बनेंगे। इसको लेकर अब एशियाई देशों के सुर लगभग एक जैसे ही हो गए हैं। आपको बता दें कि अब तक चीन, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया पश्चिमी देशों का कचरा लेते आ रहे थे। यही वजह थी कि पश्चिमी देशों लिए यह देश किसी डंपिंग यार्ड की ही तरह हो गए थे। अब पश्चिमी देशो के लिए ई-कचरा और प्लास्टिक कचरा का निवारण करने कि बड़ी समस्या है।  

इसकी वजह है कि पश्चिमी देशों से आ रहे कचरे में कई तरह का हानिकारक कचरा भी शामिल है, जो इन देशों के पर्यावरण के लिए घातक है। यही वजह है कि अब इन देशों ने इस कचरे को अपने यहां पर भेजने से इंकार कर दिया है। कुछ देशों ने तो पश्चिमी देशों से आए कचरे को वापस उसी देश में भेजने की भी तैयारी कर दी है।पश्चिमी देशों के कचरे को आयात करने वालों में केवल यही देश नहीं है। भारत की ही बात करें तो यहां यूरोप से मैटल, टैक्सटाइल और पुराने टायरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी आता है। इसके अलावा पाकिस्‍तान में भी काफी बड़ी मात्रा में ई-कचरा आता है। अफ्रीकी देश घाना में इस कचरे की वजह से हर वर्ष हजारों लोग मर जाते हैं। यहां पर दुनिया में सबसे अधिक कचरा खरीदने वाला देश घाना ही है।

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