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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मुलाकात के 5 दिन बाद शुक्रवार को पेंटागन ने 125 मिलियन डॅालर (860 करोड़ रुपये) के समझौते को मेजूरी दे दी । इसके तहत अमेरिका पाक के लड़ाकू विमान एफ-16 प्रोग्राम की 24 घंटे मॅानिटरिंग के लिए सपोर्टींग स्टाफ मुहैया करवाएगा ।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के दी जाने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक लगाने का ट्रंप का जनवरी 2019 का आदेश अब भी लागु है । ताजा फैसले से पाकिस्तान में एफ-16 लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल पर चौबीसों घंटे नजर रखने में मदद मिलेगी क्योंकि इसके तहत एफ-16 कार्यक्रम पर नजर रखने में मदद करने के लिए वहां 60 ठेकेदार प्रतिनिधियों की आवश्यकता होगी ।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया- प्रस्तावित निर्णय पूरी तरह से विदेश नीति और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को अमेरिकी तकनीकी के जरिए आधार प्रदान करता है । पाकिस्तान को संभावनाओ़ं के अनुरूप ही तकनीकी सुरक्षा टीम मुहैया करवाई जाएगी । बयान के मुताबिक- पाकिस्तान ने तकनीकी सपोर्ट सर्विस को नियमित बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार से आग्रह किया था । इसके अंतर्गत पाकिस्तान के एफ-16 प्रोग्राम को अमेरिकी सरकार, कान्ट्रैक्ट पर टेक्निकल और लॅाजिस्टिक सपोर्ट सर्विस मिलेगी ।

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