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उत्तराखंड में कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सीधी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं कहां तो सरकार को कर्मचारियों को लोकसभा चुनावों से पहले साध कर रखना था लेकिन सरकार जिस तरह के फैसले ले रही है, उससे कर्मचारियों में बडा आक्रोश पनप रहा है। पहले मामूली भत्तों में बढोतरी की और फिर कई विभागों के कई भत्तों को काट भी दिया लेकिन बडे अधिकारियों पर मेहरबानी जारी रखी।

प्रदेश में कर्मचारियों का वर्ग किसे हराना है और किसे जीताना है इन तमाम गुणा गणित को तय करता है राज्य के ढाई लाख कर्मचारी नाराज होते हैं तो सरकारें पलट जाती है लेकिन राज्य की त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार इसे समझने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदेश में कर्मचारियों का एक बड़ाा वर्ग सरकार से नाराज है, सरकार द्वारा पिछले दिनों कैबिनेट से कर्मचारियों को आवास और अन्य भत्ते देने का फैसला हुआ जिससे कर्मचारी संतुष्ट नहीं हो पाए और अब कर्मचारियों ने बडा फैसला लेते हुए 31 जनवरी को सामूहिक अवकाश और 4 फरवरी को बड़ीी रैली के साथ साथ अनिश्चित कालीन हड़़ताल की तैयारी कर ली है साफ है लोकसभा चुनावों से पहले कर्मचारियों की ये नाराजगी सरकार को भारी पड सकती है। ऐसे में जहां सरकार को कर्मचारियों की बात सुननी चाहिए थी लेकिन सरकार तो कर्मचारियों को चिढाने में जुट गई है। अब सरकार के एक और फैसले ने चुनावी साल में उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है।

शासन ने 15 भत्ते समाप्त कर दिए हैं। यह आदेश अगले महीने से लागू होगा। इन 15 भत्तों में प्रतिनियुक्ति भत्ता, कंप्यूटर भत्ता, एसटीएफ को स्पेशल भत्ता, सचिवालय में तैनाती पर विशेष भत्ता शामिल है। सचिव (वित्त) अमित नेगी ने आज आदेश जारी किया। सरकार पर बढ़ते हुए वित्तीय बोझ के देखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है। आदेश में अवैध खनन इनफोर्स्मेंट में लगे कर्मिकों का भत्ता भी ख़त्म किया गया है। साफ है सरकार के आदेशों से पुलिस को बड़ा झटका लगा है क्योंकि इस फैसले से विजिलेंस,सीबीसीआईडी, एस टी एफ इकाई को झटका, अभिसूचना, एन्टी माइनिंग फोर्स को झटका लगा है। क्योंकि अभी तक अलग से मिलने वाला अतिरिक्त भत्ता अब नही मिलेगा अभी तक इन बलो में करीब 40 फीसदी अतिरिक्त तनख्वाह थी इसलिए बडा जोखिम होने के बावजूद बडी संख्या में पुलिसकर्मी इन बलों में जाया करते थे लेकिन अब इन इकाईयों में कौन जाना पसंद करेगा वहीं वेतन भत्ता निर्धारण से जुड़ी बड़ी एक्सक्लूसिव खबर ये भी है की कर्मचारियो पर तो ज़ीरो टॉलरेंस की गाज गिरी है लेकिन अफसरो पर सरकार जबरदस्त मेहरबान हो चुकी है।

अफसरो ने खुद को बिज़नेस क्लास में एडजस्ट करा लिया है उनके किराए, आवास सुविधा सब में इज़ाफ़ा किया गया है। यानि बडे अधिकारियों ने तो हवाई जहाज में सफर करने के लिए बिजनेस क्लास की स्वीकृति सरकार से दिलवा दी है और बाकी कर्मचारियों को उनके जोखिम भत्ते भी मंजूर नहीं है। एसटीएफ, सीबीसीआईडी, एलआईयू और इंटैलिजेंस के कर्मियों के भत्ते काटे गए हैं। ये वो कर्मी हैं जो लॉ एंड आर्डर बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जोखिम का सामना करते हैं। बड़ी बात ये है की सीएम के साथ चलने वाले स्टाफ का पैसा भी बढ़ाया गया है। इसमें स्टेट पुलिस और इंटेलिजेंस से ही कर्मी जाते है। ऐसे में साफ है जब आर्थिक संकट प्रदेश में है तो क्या सिर्फ कर्मचारी खज़ाने पर बोझ है। एक लाख से अधिक तनख्वाह पाने वाले अफसरो पर मेहरबानी क्योंं कर रही है सरकार हालांंकि कर्मचारी संगठन सरकार को आईना दिखाने के लिए बडी लडाई का एलान कर रहे हैं वहीं सरकार के मंत्री साफ कह रहे हैं की सरकार ने कर्मचारियों को काफी कुछ दिया है। उनके अनुसार कर्मचारी चाहेंगे तो उनसे बात की जाएगी।

वहीं सभी जानते हैं की लोकसभा चुनावों में कर्मचारियों की क्या भूमिका रहने वाली हैं। ऐसे में कांग्रेस कर्मचारियों का समर्थन करती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने साफ कहा की कर्मचारियों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए ना की उन्हें नाराज किया जाना चाहिए।

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