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गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी के बावजूद घाटी में उम्मीद के विपरीत बुधवार को किसी जगह हड़ताल या बंदी नहीं हुई। कड़ी सुरक्षा के बीच जनजीवन सामान्य रहा। आम तौर पर केंद्र सरकार के किसी बड़े मंत्री या नेता के आने पर अलगाववादी संगठन बंदी का ऐलान करते हैं। वर्ष 1989 में कश्मीर में आतंकी हिंसा का दौर शुरू होने के साथ ही जब भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृह मंत्री समेत किसी भी प्रमुख राष्ट्रीय नेता का कश्मीर में आना हुआ तो अलगाववादियों और आतंकियों ने हमेशा दौरों का बहिष्कार कर बंदी का ऐलान किया। 

लेकिन इस बार उम्मीद के विपरीत बीते 30 सालों में यह पहला मौका है जब वादी में केंद्र सरकार के किसी बड़े मंत्री या नेता के आने पर किसी भी अलगाववादी संगठन ने बंदी का ऐलान नहीं किया। पूरी वादी में सामान्य जनजीवन आम दिनों की तरह बहाल रहा। लाल चौक जो अक्सर ऐसे मौके पर सैन्य छावनी में बदल जाता है। इस बार सामान्य रहा। जो भी कहें, लेकिन कश्मीर के हालात में बदलाव का यह एक अच्छा संकेत कहा जा सकता है।

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