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अमेरिका काम करने वाले भारतीयों के लिए अमेरिक एच-1 बी वीजा सीमित करने पे विचार कर रहा है। इस वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है। यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है और छह साल तक इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। अमेरिका हर साल 85000 लोगों को एच-वन बी वीजा देता है। जिसमें से 70 फीसदी वीजा भारत के लोगों को दिया जाता है। नये नियम के लागू होने पर अब एच-1 बी वीजा केवल 10-15 फीसदी भारतीयों को दिया जायेगा। ऐसा अमेरिका टैरिफ और ट्रेड वार  की वजह से कर रहा है।

यह नियम उन देशों पे लागू होगा जो विदेशी कम्पनियों के डेटा को अपने यहां जामा करने के लिए बाध्य करती है। भारत में नये डेटा नियम के अन्तर्गत विदेशी कम्पनियां अपना डेटा भारत में ही रखे। जिससे विदेशी कम्पनियों कि ताकत कम होगी और उन पर नियंत्रण में भी आसानी होती है। अमेरिका की कंपनियां इससे नाखुश है।

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